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कुछ खट्टा कुछ मिट्ठा !

अपन आज फिर अपने ब्लॉग की नयी पोस्ट लेके आये है॥ वो भी पूरे एक साल बाद..कोई कहानी नहीं है..बस....... पहले अपना वही पुराना रोता पीटता मुद्दाः ! ठीक है बाज़ार गरम है न्यूज़ नहीं है पर न्यूज़ चंनेल्स पर मुद्दे गरम है। नयी पिक्चर आ रही है.."तेरे बिन लादेन"...आपने पढ़ा होगा पाकिस्तान में बेन हों गयी है..क्यों क्योंकि वो लोग लादेन को like करते है उसे..उसे अपना मसीहा समझते है।! सिंपल सी बात है पर अमेरिका नहीं समझता ! उधर facebook, ऑर्कुट, ट्विट्टर सब बेन है, अब आगे देखो क्या क्या बेन होता है ! पर हम भी जन्म जात भिखमंगे है..जों अमेरिका बोलता है उसी को मानते है॥! आज....मुद्दे नहीं होते पर हक़ की लड़ाई हर जगह है अपन अपनी union के मेम्बर है! कह सकते है union communist होती है..आप इतिहास उठा के देख ले कार्ल मार्क्स से लेकर भगत सिंह तक सब अपने अपने मुद्दों पर लड़े ..और हद तक जीत भी हासिल की ! पर वो समय और था...वहा सचमुच संघटन की आवश्यकता थी....! पर में आज का संघटन देखता हूँ! जहा भी unions बनी है...क्या उनके मुद्दे सही है..हर जगह लोगो को अपनी रोटिया सेकते देखा है... ५ मई को हड़ताल थी , भ...
ये हिंदू -विन्दु , कल्चर -वल्चर क्या होता है ? ये हिंदू -विन्दु , कल्चर -वल्चर क्या होता है ? अपन बहुत खुश है आजकल EC से ..EC बोले तो "इलेक्शन कमीशन". सारी पार्टी और उम्मीदवारों की क्या वाट लगा के रखी है !. वरुण गाँधी का किस्सा तो आप लोगो ने सुना ही होगा । बेचार ने एक धर्मं की पैरवी क्या कर ली , उसको उठा के सलाखों के पीछे डाल दिया !. पता है वरुण ने क्या बोला था “अगर किसी ने हिंदू धर्मं के खिलाफ कोई बात कही तो उसके हाथ काट के रख दिए जायंगे !”. अब यह बात और है की लालू ने कहा के वरुण को रेल से कटवा देंगे !. दोनों जगह कटवाने वाली बात बराबर है !. हाँ ! यह बात और है लालू जी जल्दी ही छूट गए और वरुण अब तक फंसे है..!! अभी अपन ने कल परसों के अख़बार में पढा की मुस्लिमो को सिक्खों से सीख लेनी चाहिए । अपने खिलाफ हो रहे अत्याचार्रों (इमोशनल अत्याचारों ..इह अमर सिंह ) के प्रति !. यह बात इमाम बुखारी ने कही !. इमाम बुखारी दिल्ली की ...

खुदाया नूर बरसाया तूने

खुदाया नूर बरसाया तूने , होश तेरे बन्दों को आया , ज़लज़ला सा भर आया था सीने में उनके , ज़हर , गोली , नफरत , आग , तपिश , बंदूके , क्या क्या न झेला उन्होंने .. क्या क्या न मजबूर कराया "आम " आदमी को झेलने के लिए , एक चिंगारी जाना है जन्नत , देखना hai  darwza खुदा ऐ पाक के रहमो करम का , जों न माना किसी ने तो इल्म था यह मोत के घाट उतर दिया तुमने उनको , न पूछा मजहब उसका , न पूछी पहचान उनकी ... क्या मिला इत्तो को मार कर , क्या मिल गया दरवाज़ा जन्नत का ? जों करते इश्क हार इंसा से तो हर दरवाज़ा नोश फरमाता ! इसी आम आदमी की रहमो करम से आबाद है हर दरवाज़ा चैन ओ अमन का आखिर एक ख्वाब तो आया खुदाया नूर बरसाया तूने ...! होश तेरे बन्दों को आया ......!!

Mein kon Hoon.?

वो जो खुली पड़ी खिड़कियाँ थी, वहा अब एक साया सा दिखने लगा था.. बेचारी खिड़की का सूनापन अब दूर होने लगा था... जानी अनजानी रहो से अब वो शख्स साफ होने लगा था... और साफ देखने के लिए मैंने अपने चश्मे की धूल साफ कर ली... वो बरामदे की खुली खिड़कियों से रोज़ झाँका करता था...  कभी कभी वो हाथ हिलाकर मुझे आमंत्रित भी करता था...  और उसके हाव भाव भी मुझसे काफी मिलते थे...   जब भी में "उदास" होता वो मुझे बुलाता था....  में अचंभित आशंकित वहाँ जाने से डरता था....   एक दिन वो साया खिड़की से गायब था...  काफी ढूँढा पर...पर खिड़की का सूनापन दूर न हुआ...   थककर बैठा.....देखा वो मेरे सामने खडा था...  एक असीम उर्जा का अनुभाव किया मैंने....  पूरा कमरा प्रकाश से भर गया...  वो धीरे धीरे पास आकर मुझमे विलीन हो गया...   ये वो "दिव्य अंश" था.....  "जिससे मेरी उत्त्पत्ति हुई थी..." हाँ.... यह में हूँ...  उस देवता का स्वरूप.... भटका हुआ इंसान....   आज मानव शरीर लिए उसी "दिव्यता" को ढूँढ रहा हूँ..........!

मज़हबी रंग..?

# # उसने ज़फा किया था..उसने सजदा किया था..!! कल वो गया था, मजार पर चढाने फूल आज क्यों फोड़ आया "बम" मजार के पास मिरी?? # कहाँ तेरी इस काया में बसता हूँ में.? तू मार देता है जीता जी मुझे जब में होता हूँ माँ के स्तन से लिपटा हुआ.. शायद तेरी इबादत अभी अधूरी है..!! # रोज़ करता है वो इबादत मेरी कोई शक नहीं उसकी बंदगी में मुझे.. पर क्यों भूल जाता है वो मुझे जब फोड़ आता है बम भरे बाज़ार में..!! में तब भी वही होता हूँ.!! # वो क्या लिख भेजा था ख़त में तुमने अपने कि मोत् हमारी, आमीन तुम्हारी..! अब देख लो मोत् का मंज़र अपनी., आँखों से apni ..!!
शब्द जों आंसू बने थे, आज ज़िन्दगी की किताब पर  -लुढ़क गए, आँखों के आगे कारवां गुज़रता गया  (मुमकिन न था, देख पाना) दो ही शब्द लिखने थे, पर पंक्तियाँ जुड़ती गयी, जुड़ते जुड़ते वो भी जुड़ गए, और एक कहानी बन गयी, वही कहानी उनकी ज़िन्दगी की किताब थी,  कारवां बढ़ता जा रहा था, लोग शामिल होते जा रहे थे,' मशालें जली थी, सड़क के किनारे प्रचुर रौशनी चलती थी, आंसुओं की धारा भी अविरल, गालों पर थी...... to be continue!!

स्वामी जी कागज़ और कलम ले कर बैठ गए...

"पहाडी, घाटी, पर्वतश्रेणियों में, मन्दिर, गिरजा, मस्जिद, वेड, बाइबल, कुरान, तुझे खोजा, इन सब में--व्यर्थ ! सघन वनों में भूले शिशु सा रोया--एकाकी रोया, तुम कहा गए प्रभु, प्रिय?" चले गए॥!!! कहा ध्वनि ने| ::स्वामी विवेकानंद:: FROM : TORO KARA TORO-IV 294