संदेश

अप्रैल, 2008 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
वक्त बीता था कल..मुन्तजिर खामोशी के बीच.. दूर तलक बिसरा..मरहूम सन्नाटा था..! कुछ उनकी "आवाजें" थी.. और कुछ मेरी सुनने की चाहत..!! घने अँधेरे मे "वो" दूर तलक निकल गए......!!! मे "रौशनी" का इंतजार करता रहा.....

त्रिवेणी..उनकी याद मे

चित्र
~रात तारा टूटा था तुम हमे मांग लिया करते थे... के अब हम "हम" न रहे !:: ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~एक लड़की को कल बाज़ार मे सब्जी खरीदते देखा, "तुम" नज़र आ गए... शायद चश्मे का नम्बर बदलना है!:: ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~खाना बनाते वक्त तुम्हारा हाथ जल जाता था, तुम मुझे बताते थे, मुझे फिक्र होती थी... मे खाना बनाता हूँ...हाथ नहीं जलते!:: ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~तुम्हे देखा देखी, मेने भी चश्मा बनवा लिया था, "अब" तुम्हे इसकी ज़रूरत नहीं... पर mera तो इसके बिना kaam चलता नहीं!:: ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~तुम्हारी वो कैसेट "तुम बिन" आज भी मेरे पास पड़ी है... तुम बिन पे "स्याही" गिर गयी है!:: ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~तुम्हे "सोनू निगम" अच्छा लगता था, और सारे दोस्त मुझे "निगम साब" बुलाते थे... अब मेरा नाम लिया करते है!:: ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~"मेरे" उनके बारे मे तुमने बहुत कुछ सुन रखा था, तुम बहुत परेशां हुआ करती थी... उन्होने अपने "बॉय फ्रेंड" से शादी कर ली है!...