WHAT IS LOVE....

इमरोज़ और अमृता के बीच एक अनकहा रिश्ता था....जिसे उन्होने ताउम्र कोई नाम नहीं दिया...

अमृता इमरोज़ के स्कूटर के पीछे बैठ कर जाती थी.....एक रोज अमृता स्कूटर पर पीछे बैठी थी...उसने इमरोज़ की पीठ पर अपनी अंगुली से "साहिर" लिख दिया..! अमृता ने पूछा ये कोन है...इमरोज़ बोला ये "इमरोज़" है....जबकि वो इस बात को जानता था के यह में नहीं हूँ.....हर बार अमृता इमरोज़ की पीठ पर साहिर लिखती और इमरोज़ कहता के यह मेरा नाम है...

उम्र के अन्तिम पडाव में इमरोज़ कहता है......अमृता चाहे किसी से भी प्रेम करे पर यह मेरी अंतरात्मा की आवाज़ है के में अमृता से प्रेम करता हूँ...और यह अधिकार मुझसे भगवान भी नहीं ले सकता!


और अब ये अमृता पर निर्भर करता है के वो किस्से प्रेम करती है....!कितने बड़े दिल वाला था इमरोज़....अंत में अमृता कहती है....हमारे बीच एक ऐसा अनकहा रिश्ता था...जिसे आज तक में नाम भी न दे पाई! हमने कभी एक दुसरे को कह कर नहीं बताया के हम एक दुसरे से प्रेम करते है......किसा अमर प्रेम था ये..जों बिना बताये चल रहा था......

अमृता ने कभी साहिर को तलक नहीं दिया और इमरोज़ से शादी भी नहीं की....
पर मरने तक इमरोज़ के साथ रही....

यही बात हम पर (आम आदमी पर ) भी लागू होती है....हम किसी से प्रेम करते है...और बदले में प्रेम पाने की इच्छा रखते है....जों सरासर गलत है....ये हमारी intire feeling है के हम किसी से भी प्रेम करे पर बदले में कुछ पाने की इच्छा न रखे.......वही प्रेम सफल है....

सर्वस्व अर्पण ही "प्रेम" है....

अब चाहे वो मीरा का कृष्ण से हों ..या गोपियों का...फल दोनों का समान है....

प्रेमचंद ने कहा है....."प्रेम न खातो मीप्जे...प्रेम ना हाट बिकाय..." love cannot be expressed with words and not can be purchased frm maket....it happens n we don't know why ??.......


और शायद इसी के कारण यह पृथ्वी है और समस्त मानव प्रजाति है.....

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