वक्त बीता था कल..मुन्तजिर खामोशी के बीच..
दूर तलक बिसरा..मरहूम सन्नाटा था..!
कुछ उनकी "आवाजें" थी..
और कुछ मेरी सुनने की चाहत..!!
घने अँधेरे मे "वो" दूर तलक निकल गए......!!!
मे "रौशनी" का इंतजार करता रहा.....

टिप्पणियाँ

SAHITYIKA ने कहा…
hey..
nice try..
some of ur poems are really nice.
lekin mujhe lagta hai yadi iname tukbandi ho to padhne walo ko jayada ras aayega..
n cn u tell me wht is triveni?

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